कबड्डी की प्राचीन परंपरा और आधुनिक सफर
कबड्डी की जड़ें वैदिक काल तक जाती हैं, जब यह शिकार और आत्मरक्षा कौशल को निखारने का तरीका था। महाभारत में भी इससे मिलते-जुलते खेल का उल्लेख मिलता है। बीसवीं सदी में इसे संगठित रूप मिला — 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारत ने प्रदर्शन मैच खेला। 1950 में अखिल भारतीय कबड्डी महासंघ बना और नियम मानकीकृत हुए। लखनऊ जैसे शहरों में
क्लब स्तर पर इसकी जड़ें गहरी हैं। 2014 में Pro Kabaddi League के आने से यह खेल करोड़ों दर्शकों तक पहुँचा।